बुधवार, 10 जुलाई 2013

सहस्राब्दि विकास लक्ष्य रिपोर्ट-2013

संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव बॉन की मून ने सहस्राब्दि विकास लक्ष्य रिपोर्ट-2013 1 जुलाई 2013 को जारी की. संयुक्त राष्ट्र कीइस रिपोर्ट के अनुसार  सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों (एमडीजी) को स्थापित करने के 13 वर्ष बाद विश्वभर के देशों ने वर्ष 2015 की तय समय सीमा तक गरीबी उन्मूलन के आठ लक्ष्यों को पूरा करने के लिए बड़े कदम उठाए हैं.
ये आठ लक्ष्य निम्नलिखित हैं:
गरीबी उन्मूलन
शिक्षा
लिंग समानता
बच्चों की मृत्युदर में कमी
मां का बेहतर स्वास्थ्य
पर्यावरणीय स्थिरता
एचआईवी, एड्स और मलेरिया पर नियंत्रण 
विकास के लिए वैश्विक साझीदारी

बॉन की मून ने कहा कि सभी के लिए अधिक न्यायोचित, सुरक्षित और स्थायी भविष्य सुनिश्चित करने के हमारे प्रयासों को तेज किया जाना चाहिए. रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन लक्ष्यों को पूरा नहीं किया जा सका है, वे अब भी पूरे किए जा सकते हैं लेकिन इसके लिए देशों को अपने प्रयास और तेज करने की ज़रूरत है.
सहस्राब्दि विकास लक्ष्य रिपोर्ट 2013 के एक अनुमान के अनुसार  विश्वभर में वर्ष 2010 में 287000 मातृत्व मौतें हुईं. वर्ष 1990 से इस आंकड़े की तुलना में इसमें 47 प्रतिशत की कमी आई है.

रिपोर्ट के अनुसार इनमें से सर्वाधिक मौतें 56 प्रतिशत सब-सहारा अफ्रीका में तथा 29 प्रतिशत के साथ दक्षिण एशिया दूसरे स्थान पर है.  कुल 85 फीसदी मातृत्व मौतें इन दोनों क्षेत्रों में होती है.

सहस्राब्दि विकास लक्ष्य रिपोर्ट-2013: भारत 

सहस्राब्दि विकास लक्ष्य रिपोर्ट-2013 के अनुसार भारत में वर्ष 2010 में मां बनने के दौरान 56000 महिलाओं की मृत्यु हुई अर्थात औसतन प्रतिघंटे 6 और प्रति 10 मिनट में ऐसी एक मौत हुई.
सहस्राब्दि विकास लक्ष्य रिपोर्ट-2013 के तहत भारत को मातृत्व मृत्यु दर के आंकड़े को घटाकर 109 तक लाना है जबकि वर्ष 2013 तक भारत में प्रति एक लाख जन्मों पर मातृत्व मृत्यु दर 212 है.
सहस्राब्दि विकास लक्ष्य रिपोर्ट-2013 के अनुसार भारत के लिए इस लक्ष्य को प्राप्त करना असंभव है.
रिपोर्ट के अनुसार भारत मातृत्व मुत्य दर को कम करने के मामले में प्रगति की है. वर्ष 1999 से 2009 के बीच मां बनने के दौरान होने वाली मौतों में 38 फीसदी की कमी आई.
वर्ष 2010 के आंकड़ों के अनुसार भारत में प्रतिदिन 150 महिलाएं प्रसव के दौरान मर रही हैं. भारत सरकार को इस स्थिति को रोकना होगा और महिलाओं को गर्भ निरोधकों के बारे में जागरुक करना होगा.

   

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