बुधवार, 23 अक्तूबर 2013

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की दो दिवसीय रूस की यात्रा पांच समझौतों पर हस्ताक्षर के साथ संपन्न

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की दो दिवसीय रूस की यात्रा 21 अक्टूबर 2013 को संपन्न हो गई. इस यात्रा का उद्देश्य 14वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेना था. इसका आयोजन मास्को में आयोजित इस वार्षिक शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर वी पुतिन और भारत के प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने  की.

यात्रा के दौरान मॉस्को में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई. वार्ता के बाद दोनों देशों ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा ऊर्जा सुरक्षा सहित पांच समझौतों पर हस्ताक्षर किए जो निम्नलिखित हैं.

सजायाफ्ता व्यक्तियों के स्थानांतरण संबंधी सहमति पत्र पर हस्ताक्षर
ऊर्जा दक्षता के क्षेत्र में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर
मानकीकरण और अनुरूपता आकलन के क्षेत्र में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर
विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग के कार्यक्रम पर हस्ताक्षर
वर्ष 2014-2017 की अवधि के लिए जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग के कार्यक्रम पर हस्ताक्षर

इसके अलावां दोनों देशों ने वार्ता के दौरान निम्नलिखित बिन्दुओं पर भी सहमति व्यक्त की:

दोनों देशों ने आतंकवाद को समाप्त करने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में सहयोग की प्रतिबद्धता व्यक्त की.
शिखर और प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत में दोनों देशों के बीच सीरिया, अफगानिस्तान और ईरान के मुद्दों के अलावा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साथ-साथ काम करने पर सहमति बनी.
दोनों देशों ने ब्रिक्स, जी-20, पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन और संयुक्त राष्ट्र सहित बहुराष्ट्रीय मंचों पर मिल-जुलकर काम करने का फैसला लिया.
दोनों देशों ने एक दूसरे के यहां निवेश बढ़ाने के साथ-साथ तेल और गैस, उर्जा, सूचना प्रौद्यागिकी, उड्डयन, हाईड्रोकार्बन और खनन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आपसी सहयोग में तेजी लाने पर बल दिया.
दोनों देशों ने कुडनकुलम परमाणु उर्जा संयंत्र की तीसरी और चौथी इकाई की स्थापना को लेकर सभी तरह की बाधाएं दूर करने पर सहमति व्यक्त की.
दोनों देशों के नेताओं ने कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना के बकाया मुद्दों के जल्द से जल्द समाधान हेतु अधिकारियों को निर्देश भी दिए.
सम्मेलन के दौरान रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में स्थायी सदस्यता के भारत के दावे का समर्थन किया.
दोनों नेताओं ने रॉकेट, मिसाइल, नौसैनिक प्रौद्योगिकी और हथियार प्रणालियों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के बारे में व्यापक चर्चा की.

प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह को स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंटरनेशनल रिलेशंस, मास्को द्वारा डॉक्टरेट की मांड उपाधि प्रदान की.


विदित हो कि कुडाकुलम परमाणु ऊर्जा की तीसरी और चौथी ईकाइ को लेकर कोई समझौता नहीं हुआ, लेकिन दोनों देशों ने साफ किया है कि वर्ष 2010 के परमाणु ऊर्जा के नागरिक उपयोग को लेकर वे समझौते को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है.

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