सोमवार, 5 नवंबर 2012

अमेरिकी चुनाव प्रक्रिया


अमेरिकी चुनाव की प्रक्रिया बहुत लंबी होती है विशेषज्ञों के अनुसार राष्ट्रपति पद के चुनाव में सालों से केवल दो ही पार्टियों डेमोक्रेटिक और रिपब्लिक की ही भूमिका रहती है अमेरिकी चुनाव की शुरुआत प्राथमिक चुनाव से  हो जाती है।प्राथमिक से मतलब है जब अमेरिका के दो राजनीतिक दल रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी राष्ट्रपति पद के लिए अपने-अपने उम्मीदवारों का चुनाव करती हैं, और फिर आधिकारिक रूप से अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान करती हैं अमेरिकी राष्ट्रपति पद का चुनाव दो चरणों में बंटा होता है, प्राथमिक  और आम चुनाव. विभिन्न राज्यों में प्राथमिक चुनाव के जरिए पार्टियां अपने सबसे प्रबल दावेदार का पता लगाती हैं अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिये कोई दो बार से अधिक चुनाव नहीं लड़ सकता और डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से मौजूदा राष्ट्रपति बराक ओबामा के मैदान में होने के कारण इस पार्टी की ओर से कोई प्राथमिक चुनाव इस बार नहीं हुए, लेकिन रिपब्लिकन पार्टी में प्राथमिक चुनाव हुए, जिसमें मिट रोमनी सबसे प्रबल दावेदार बनकर उभरे
अमेरिका चुनाव में प्राथमिक चुनाव का चरण पूरा हो चुका है।प्राथमिक चुनाव को राष्ट्रपति चुनाव से पूर्व की प्रक्रिया के रूप में समझा जा सकता है इसके तहत रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी अपने अपने उम्मीदवार चुनते हैंइसके लिए सभी राज्य अपने अपने तरीकों से चुनाव कराते हैं. अमेरिका में प्राथमिक चुनाव भी दो तरीकों से होता है, पहला-प्राथमिक,और दूसरा कॉकस
प्राथमिक तरीका ज्यादा परंपरागत है और अधिकतकर राज्यों में इसे ही अपनाया जाता है इसमें आम नागरिक हिस्सा लेते हैं और पार्टी को बताते हैं कि उनकी पसंद का उम्मीदवार कौन सा हैवही, कॉकस चुनाव प्रक्रिया का प्रयोग ज्यादतर उन राज्यों में होता है, जहां पर पार्टी के गढ़ होते हैं कॉकस में ज्यादातर पार्टी के पारंपरिक वोटर ही हिस्सा लेते हैं. जैसे इस बारप्राथमिक चुनाव की शुरुआत कॉकस प्रक्रिया से हुई थी और सबसे पहला कॉकस चुनाव आयोवा प्रांत में हुआ थाअमेरिका में दो ही प्रमुख राजनीतिक दल हैं : डेमोक्रेट और रिपब्लिक और 1869 से देश का राष्ट्रपति इन्हीं दो प्रमुख पार्टियों से रहा है. कांग्रेस की 535 सीटों में से 533 सीटों पर इन्हीं दोनों दलों का कब्जा है इस समय सीनेट में डेमोक्रेट्स का तो प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन का कब्जा है
प्रत्येक राज्य के मतदाता अपने अपने उम्मीदवार के डेलीगेट के नाम वोट देते हैं और फिर वो डेलीगेट अपनी अपनी पार्टी नेशनल कन्वेंशन में एकत्रित होते हैं और सभी राज्यों से जिस प्रत्याशी के डेलीगेट ज्यादा होते हैं उसे उम्मीदवार घोषित कर दिया जाता है रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी प्राथमिक चुनाव के जरिए अपने -अपने उम्मीदवार चुनते हैं और पार्टी की नेशनल कन्वेंशन में आधिकारिक रूप से अपने अपने प्रत्याशियों का ऐलान करते हैं आमतौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव का प्राथमिक चुनाव फरवरी से मार्च के बीच होता है और फिर कुछ सप्ताह बाद ही पार्टियां उम्मीदवार का ऐलान कर देती हैं यहां से चुनाव प्रचार शुरू होता है और फिर चुनाव का दिन आता है, जो कि सुपर ट्यूसडे को ही होता है. सुपर ट्यूसडे अमेरिकी चुनाव की परंपरा से जुड़ा है और ये नवंबर के पहले सप्ताह में आता है इसी दिन राष्ट्रपति चुनाव होता है. जैसे इस बार 6 नवबंर को मंगलवार के दिन अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव होगाजीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम 270 वोट की जरूरत है बराक ओबामा देश के 43वें राष्ट्रपति हैं और अभी तक का इतिहास बताता है कि 20 राष्ट्रपति फिर से राष्ट्रपति पद पर सत्तासीन होने में सफल रहे हैंप्राथमिक चुनाव यानी अपनी पार्टी में उम्मीदवारी की रेस जीतने के बाद जब दोनों प्रत्याशी इलेक्शन डे में आमने सामने आते हैं और जनता वोट देती है इलेक्शन डे के मतदान का तरीका भी प्राइमरी के जैसा ही है. जैसे वहां डेलीगेट चुने जाते हैं ठीक वैसे ही इलेक्शन डे में इलेक्टर्स चुने जाते हैं. इसे इलेक्टोरल कॉलेज कहा जाता है यानी ऐसा समूह जिसे अमेरिकी जनता चुनती है और फिर वो राष्ट्रपति की जीत का ऐलान करते हैं


अमेरिकी इलेक्ट्रोरल कॉलेज में 538 इलेक्टर्स होते हैं. अब सवाल ये आता है कि ये संख्या 538 ही क्यों है, दरअसल ये संख्या अमेरिका के दोनों सदनों की संख्या का जोड़ है। अमेरिकी सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स यानी प्रतिनिधि सभा और सीनेट का जोड़ है प्रतिनिधि सभा में 435 सदस्य होते हैं, जबकि सीनेट में 100 सांसद. इन दोनों सदनों को मिलाकर संख्या होती है 535. अब इसमें 3 सदस्य और जोड़ दीजिए और ये तीन सदस्य आते हैं अमेरिका के 51वें राज्य कोलंबिया से. इस तरह कुल 538 इलेक्टर्स अमेरिकी राष्ट्रपति चुनते हैं

उपराष्ट्रपति
इस साल अमेरिका में 6 नवंबर को ही राष्ट्रपति पद के लिए होने वाले चुनाव में ही इलेक्टोरल कॉलेज उपराष्ट्रपति पद के लिए भी मतदान करेगा। कोई भी इलेक्टर दोनों पदों के लिए एक ही स्टेट के उम्मीदवारों को वोट नहीं दे सकता है। चुनाव के इस तरीके से उप राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार द्वारा राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को चुनौती देने की संभावना खत्म हो गई। 1804 से पहले उपराष्ट्रपति का चुनाव भी इलेक्टोरल कॉलेज ही करता था, लेकिन तब अलग-अलग मत नहीं डाले जाते थे। तब जिसे सबसे ज्यादा वोट मिलते था, वह राष्ट्रपति बनता था। दूसरे नंबर पर रहने वाला व्यक्ति उपराष्ट्रपति चुना जाता था।


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

कुल पेज दृश्य